1,147 आवेदकों में से विभिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमि के 80 विश्वविद्यालय स्तरीय छात्रों को चुना गया
एनएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन ने इंटर्नशिप का उद्घाटन करते हुए कहा कि बढ़ते वैश्विक संघर्षों के बीच मानवाधिकारों को समझना और भी महत्वपूर्ण हो गया है
एनएचआरसी के महासचिव श्री भरत लाल ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा को बनाए रखना नागरिकों का सामूहिक कर्तव्य है
09 MAR 2026 6:47PM Released by PIB Delhi
भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने आज मार्च 2026 के लिए अपना ऑनलाइन अल्पकालिक इंटर्नशिप कार्यक्रम (ओएसटीआई) शुरू किया। अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन ने महासचिव श्री भरत लाल और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में इसका उद्घाटन किया। देश भर के 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 1,147 आवेदकों आए। जिनमें से विभिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमि के 80 विश्वविद्यालय स्तरीय छात्र का चयन किया गया। दो सप्ताह का यह कार्यक्रम 20 मार्च 2026 को समाप्त होगा ।
न्यायमूर्ति रामासुब्रमणियन ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के इंटर्नशिप कार्यक्रम में लड़कियों की बढ़ती भागीदारी पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की समृद्धि, समानता, निष्पक्षता, न्याय और सामाजिक चेतना को बढ़ाने के लिए महिलाओं में अधिक शिक्षा और जागरूकता आवश्यक है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि प्रशिक्षु, मानवाधिकारों के ज्ञान का उपयोग अपने करियर को आगे बढ़ाने के साथ साथ अपने चरित्र और समाज के प्रति दृष्टिकोण को समृद्ध करने के लिए भी करेंगी।

सिडनी स्थित अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंक – इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस द्वारा जारी वैश्विक शांति सूचकांक का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि आज दुनिया के 78 देश शांति और स्वतंत्रता के नाम पर अपनी सीमाओं के बाहर सशस्त्र संघर्षों में लगे हुए हैं। विडंबना यह है कि जो लोग शांति की बात कर रहे थे, वे अब युद्ध की बात कर रहे हैं। ऐसे संघर्षों के मानव सभ्यता और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर परिणाम होते हैं। लगभग 12 करोड़ लोग शरणार्थी या आंतरिक रूप से विस्थापित हुए हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था को लगभग 20 ट्रिलियन डॉलर का अनुमानित नुकसान हुआ है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इसी संदर्भ में मानवाधिकारों का सही अर्थ और महत्व समझा जाना चाहिए।

इससे पहले, अपने संबोधन में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के महासचिव श्री भरत लाल ने कहा कि देश नागरिकों का होता है और प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा को बनाए रखते हुए इसे एक बेहतर और अधिक सुंदर स्थान बनाना उनकी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि “विकसित भारत” की अवधारणा लोगों के दैनिक जीवन में, घरों में, स्कूलों, कॉलेजों, छात्रावासों, कार्यस्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर प्रतिबिंबित होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रख्यात वक्ताओं के साथ संवाद से प्रशिक्षुओं को सीखने का एक अनूठा अवसर मिलेगा। इससे वे मानवाधिकार क्षेत्र में अनुभवी विशेषज्ञों के साथ सीधे जुड़ सकेंगे। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रशिक्षुओं को मानवाधिकारों के राजदूत के रूप में तैयार करना है। उन्होंने प्रतिभागियों से यह भी आग्रह किया कि वे इन दो सप्ताहों का उपयोग स्वयं को जागरूक करने के लिए करें, ताकि वे जहां भी अन्याय हो उसे पहचान सकें और भेद-भाव, चाहे वह व्यवस्थागत हो या अन्य प्रकार का, को समझ सकें।

भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की संयुक्त सचिव श्रीमती साइडिंगपुई छकछुआक ने इंटर्नशिप के सुनियोजित पाठ्यक्रम का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। इसमें व्याख्यान, टीम और व्यक्तिगत प्रतियोगिताएं जैसे समूह अनुसंधान परियोजना प्रस्तुति, पुस्तक समीक्षा और भाषण प्रतियोगिता शामिल हैं। साथ ही, कामकाज की जानकारी के लिए तिहाड़ आश्रय गृह और पुलिस स्टेशन जैसे संस्थानों के वर्चुअल टूर भी शामिल हैं। इस अवसर पर एनएचआरसी के संयुक्त सचिव श्री समीर कुमार भी उपस्थित थे।

